Song Credits:
Song - Mitti Ke Bete
Song - Mitti Ke Bete
Music - Mithoon
Singer - Sonu Nigam
Lyrics - Manoj Muntashir
Music Label - T-Series
डिस्क्रिप्शन
मिट्टी के बेटे" एक अत्यंत भावुक और देशभक्ति से ओत-प्रोत गीत है, जो उन वीर सैनिकों को समर्पित है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। मिथुन द्वारा रचित मधुर और हृदय स्पर्शी संगीत के साथ, सोनू निगम की मखमली और दर्द भरी आवाज़ इस गीत में जान फूंक देती है। मनोज मुंतशिर के लिखे बोल सीधे दिल पर चोट करते हैं, जो शहादत के गौरव और पीछे छूटे परिवार के अकेलेपन के बीच के संतुलन को बखूबी दर्शाते हैं।
गीत की शुरुआत सैनिकों के उस बेफिक्र अंदाज़ के चित्रण से होती है, जहाँ वे मौत को भी हँसकर गले लगाते हैं। "सर पे कफ़न" बांधकर चलने वाले ये वीर जब वापस नहीं लौटते, तो वे केवल एक याद बनकर रह जाते हैं। बोलों में भगत सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों के बलिदान का भी संदर्भ मिलता है, जिन्होंने तिरंगे की शान के लिए फाँसी के फंदे को चूम लिया था।
इस गीत का सबसे भावुक हिस्सा वह है जहाँ एक शहीद सैनिक अपने पिता और दोस्तों से संवाद करता है। वह कहता है कि "तेरा दर्द तू जाने बाबा, मैं तो खुशी से पागल हु," क्योंकि उसे उस मिट्टी की गोद में समाने का सौभाग्य मिला है जहाँ वह बचपन में खेला था। पिता से अपनी अधूरी जवानी जीने का आग्रह और दोस्तों की यादों में "हिचकी" बनकर आने की बात श्रोताओं की आँखों में आंसू ला देती है।
अंत में, गीत में इस्तेमाल किया गया "राम" का रूपक कि कुछ राम कभी वनवास से लौटकर वापस नहीं आते शहादत की त्रासदी को एक गहरा आध्यात्मिक और मानवीय कोण देता है। यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं, बल्कि उन माताओं और परिवारों के प्रति एक श्रद्धांजलि है, जिनके "अल बेले" बेटे तिरंगे में लिपटकर लौटे या कभी वापस ही नहीं आए। टी-सीरीज के बैनर तले बना यह गीत हर भारतीय के मन में गर्व और संवेदना का संचार करता है।
Lyrics
क्या मन मौजी बेफिक्र थे
क्या मन मौजी बेफिक्र थे
मौत पे अपने हँसते थे
दिल में वतन को रखने वाले
सर पे कफ़न भी रखते थे
हम जो तिरंगा लहराएंगे
हिचकी बनके याद आयेंगे
वो मिट्टी के बेटे जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे वो मिट्टी के बेटे
वो मां के अल बेले जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
हो हो हो हो हो…
मिट्टी के बेटे
हो हो हो हो हो…
मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
जिसके लिए सरदार हमारा झूल गया था फंदे पर
धूल नहीं लगने दी हमने उस बेदाग तिरंगे पर
उस बेदाग तिरंगे पर, उस बेदाग तिरंगे पर
तेरा दर्द तू जाने बाबा
तेरा दर्द तू जाने बाबा
मैं तो खुशी से पागल हूं
जिसकी गोदी में खेला मैं
चला उसी के कंधे पर
Hamm… लाडले जब सरहद जाएंगे
हिचकी बनके याद आयेंगे
वो मिट्टी के बेटे जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे वो मिट्टी के बेटे
वो मां के अल बेले जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
ओ छल ये कहा पता था तू यारों को छल जाएगा
जो चढ़ता सूरज था अपना वो ऐसे ढल जाएगा
वो ऐसे ढल जाएगा, वो ऐसे ढल जाएगा
तेरे बिन सरहद से हम भी
तेरे बिन सरहद से हम भी
आधे अधूरे लौटेंगे
तेरी चिता में धीरे से कुछ
अपना भी जल जाएगा
यार गले जब लग जाएंगे
हिचकी बनके याद आयेंगे
वो मिट्टी के बेटे जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे वो मिट्टी के बेटे
वो माँ के अल बेले जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
मुझे दर्द कभी सोते ही नहीं
वनवास ख़त्म होते ही नहीं
चौखट पे दिए जलते ही रहे
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
मेरे नाम का प्याला भर के
हो हो हो मेरे नाम का प्याला भर के
बरसातों में पी लेना
बाबा मैं तो रहा नहीं
तू मेरी जवानी जी लेना
हम जब जन गण मन गायेंगे
हिचकी बनके याद आयेंगे
वो मिट्टी के बेटे जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे वो मिट्टी के बेटे
वो मां के अल बेले जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
हो हो हो हो हो…
मिट्टी के बेटे
हो हो हो हो हो…
मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे
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