साधु एस. तिवारी द्वारा रचित और गाए गए इस गीत में माता पार्वती की भगवान शिव को पति रूप में पाने की अटूट जिद और सप्तर्षियों द्वारा उनकी परीक्षा लेने (समझाने) का सुंदर वर्णन किया गया है।
गीत का मुख्य सारांश:
सप्तर्षियों की चेतावनी: जब माता पार्वती शिव को पाने के लिए घोर तपस्या कर रही होती हैं, तब सप्तर्षि उन्हें समझाने आते हैं कि वे एक ऐसे वर के लिए व्यर्थ में तप क्यों कर रही हैं जिसका कोई सांसारिक वजूद या संपत्ति नहीं है।
शिव का वैरागी जीवन: ऋषि तर्क देते हैं कि शिव के पास रहने के लिए कोई घर या फूस की झोपड़ी भी नहीं है (ना खपरा ना छपरा)। उनका रहन-सहन बिल्कुल एक अवधूत (संन्यासी) की तरह है और उनके पास खाने या सुख-सुविधा का कोई साधन नहीं है।
भयंकर और अनोखा स्वरूप: सप्तर्षि बताते हैं कि शिव का रूप बहुत भयंकर है। उनके सिर पर गंगा और उलझी हुई जटाएं हैं जिन्हें वे कभी नहीं संवारते। गले में सांप, माथे पर आधा चांद है और वे बैल की सवारी करते हैं।
घर-गृहस्थी से वैराग्य: शिव अत्यंत सीधे-सादे (भोलेनाथ) हैं जो हमेशा राम-नाम के रस में डूबे रहते हैं। जिन्होंने कामदेव (इच्छाओं के देव) को ही भस्म कर दिया, उन्हें घर-गृहस्थी और वैवाहिक जीवन से कोई लगाव या समझ नहीं है।
यह गीत मूल रूप से सांसारिक दृष्टिकोण और भगवान शिव के दिव्य, संन्यासी स्वरूप के बीच के अंतर को दर्शाता है, जहाँ दुनिया के तर्कों के बावजूद माता पार्वती अपने प्रेम और संकल्प पर पूरी तरह अडिग हैं
LYRICS
जब ज़िद पे आ गई पार्वती
समझाने पहुँचे सप्तऋषि
काय ज़िद कर रही
काय को मर रही
ऐसे वर के लाने
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप
इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ
ना खपरा ना छपरा
ना फूस की धरे मड़इया
का खावे को धरो वहाँ
बस रोवत रहत लड़इया
भेष धरे अवधूत फिरे, अब तुमसे का कहे बिन्नू
डोरा डांगर ले घूमें
वे इनके कछुए नइयाँ
काय ज़िद कर रही
काय को मर रही
ऐसे वर के लाने
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप
इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ
जटा लटा न कबहुँ सँवारे,
दीसत महा भयंकर।
मूड़ पे आधो चंदा और,
बेला पे घूमे शंकर
राम नाम के रसिया हैं वे
और उन्हें क्या चाहने
कामदेव के मर्दनहारी
घर-गृहस्थी क्या जाने
अरे घर-गृहस्थी क्या जाने
काय ज़िद कर रही
काय तप कर रही
ऐसे वर के लाने
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे साँप
इतने सीधे-सादे हैं, सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ
Label - Times Music Spiritual
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