प्यारी लगे एक अत्यंत कोमल और भावुक गीत है, जो सादगी और निस्वार्थ प्रेम की सुंदरता को उजागर करता है। इस गीत की रचना और गायन विशाल मिश्रा ने किया है, जिनका साथ अपनी सुरीली आवाज़ से तुलसी कुमार ने दिया है। गीत के शब्द मनोज मुंतशिर द्वारा लिखे गए हैं, जो अपनी लेखनी से गहरे जज़्बातों को पन्नों पर उतारने के लिए जाने जाते हैं। संगीत सहायक के रूप में कुमार गौरव सिंह, त्रिहांगकु लाहकर और बिटुपन बरुआ ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
गीत का मुख्य भाव स्वीकार्यता पर आधारित है। इसमें प्रेमी अपनी साथी से कहता है कि वह जैसी है, वैसी ही उसे बेहद प्यारी लगती है और उसे बदलने के लिए किसी नए रंग या बनावट की जरूरत नहीं है। यह पंक्तियाँ आधुनिक युग में दिखावे से दूर, इंसान के वास्तविक स्वरूप से प्रेम करने का संदेश देती हैं। गीत में अजनबी से शुरू हुए रिश्ते का गहराकर वर्षों पुरानी दोस्ती में बदल जाने का अहसास बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।
गीत के अंतराओं में विरह और मिलन की तड़प का भी सुंदर चित्रण है। जहाँ एक ओर विशाल मिश्रा की आवाज़ में "सुरमई आँखों" और "जादू सी बातों" की तारीफ है, वहीं तुलसी कुमार के स्वरों में साथी के बिना "मेहंदी बिन हथेली" जैसा अधूरापन महसूस होता है। "रात कितनी भारी लगे" जैसी पंक्तियाँ प्रेमी की अनुपस्थिति में बीतने वाले मुश्किल समय को दर्शाती हैं। अंततः, यह गीत एक ऐसा मधुर संवाद है जो यह बताता है कि जब प्रेम सच्चा होता है, तो सामने वाला व्यक्ति अपनी खामियों के साथ भी दुनिया में सबसे सुंदर नज़र आता है।
Song Credits
Song - pyaari lage
Composer - Vishal Mishra
Lyrics - Manoj Muntashir
Vocals - Vishal Mishra, Tulsi Kumar
Music Assistant - Kumar Gaurav Singh, Trihangku Lahkar, Bitupon Boruah
Lyrics
हम खूबसूरत है तू इस कदर
क्या कहूं देखने में तुझे
उम्र सारी लगे तुझ में
जोड़ू ना मैं कोई रंग नया
जैसी है तू मुझे वैसी प्यारी लगे
जैसी है तू मुझे वैसी प्यारी लगे
अजनबी सी कभी तू लगी थी मुझे
आज सोचूं तो बरसों की यारी लगे
तुझ में जोड़ू ना मैं कोई रंग नया
जैसी है तू मुझे वैसी प्यारी लगे
चो मेरे उड़ना
सजना च तेरे संग जीना मेरे
हम सुरमई ये आंखें
जादू सी बातें तू वो हवा है
जिसमें मैं बह गया
शामों शहर बस तेरी तारीफ
ऐसा लगे फिर भी कुछ कम रह गया
लाख कोशिश करूं पर उतरती नहीं
कोई पिछले जन्म की उधारी लगे
तुझ में जोड़ू ना मैं कोई रंग नया
जैसी है तू मुझे वैसी प्यारी लगे
अजनबी सी कभी तू लगी थी मुझे
आज सोचूं तो बरसों की यारी लगे
तुझ में जोड़ू ना मैं कोई रंग नया
जैसी है तू मुझे वैसी प्यारी लगे
सुनीसनी सी मैं तुम बिन
ऐसे हूं जैसे मेहंदी बिन हथेली
साजना मेरा मुश्किल जीना
मर ही जाऊंगी जो हुई अकेली साजना
ये मेरी करवटों से कभी पूछ लो
रात तुम मुझे कितनी भारी लगे
तुझ में जोड़ू ना मैं कोई रंग नया
जैसी है तू मुझे वैसी प्यारी लगे
अजनबी सी कभी तू लगी थी मुझे
आज सोचूं तो बरसों की यारी लगे
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